Navpad Oli starts from October 14, 2010, Ashwin Shukla Saptami. This nine days festival will prolong till Sharad Purnima, October 22.
Sri Jain Shwetambar Khartar Gachchh Sangh, Jaipur will organize Navpad Oli both in Jaipur and Malpura.
Navapad Oli will be celebrated in Jaipur at Shiv Ji Ram Bhawan in the auspices of P.P. Sanyamnidhi Shree Ji, Atmanidhi Shree ji. There will be arrangement of Ayambil at the Sangh Bhawan. Daily Pravachan on Sripal Ras will be held at Vichakshan Bhawan in the morning hours.
Navpad Oli (Ayambil Oli) will be celebrated in Malpura Dadabadi in he auspices of P.P. Chandrakala Shree Ji and P.P. Maniprabha Shree Ji Maharaj. Navpad Puja will be conducted in the afternoon on first six days of the Navpad Oli. There will be Siddhchakra Mahapujan on the seventh day, i.e. October 20. Navapad Mahapujan will be on 21 and Dadaguru Dev Pujan will be organized on October 22, Sharad Purnima.
Three days long Vichakshan Smrii Samaroha will be organized on 17, 18 and 19 October. Khartar Gachchh Sangh, Jaipur will organize all these program in Malpura Dadabadi.
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Navpad Oli in Jainism
Shiv Ji Ram Bhawan is head quarter of Shri Jain Swetambar Khartar Gachchh Sangh, Jaipur, situated at MSB Ka Rasta, Johari Bazar in the Pink city. Several Temples, Dadabadi, Dharmshala including Malpura Teerth are managed by Khartar Gachchh Sangh of Jaipur.
Monday, 11 October 2010
आमेर तीर्थ पर ऐतिहासिक मेला एवं चंदाप्रभु भगवान के मंदिर में श्री नन्दीश्वर द्वीप पूजन धूमधाम से संपन्न
आमेर तीर्थ पर ऐतिहासिक मेला एवं आमेर श्री चंदाप्रभु भगवान के मंदिर में श्री नन्दीश्वर द्वीप पूजन कल 10 अक्टूबर को धूमधाम से संपन्न हुआ. इस अवसर पर परम पूज्या साध्वी श्री मणिप्रभा श्री जी की सुशिष्या गण प्. पु. साध्वी विद्युत्प्रभा श्री जी, हेमप्रज्ञा श्री जी, संयम निधि श्री जी, आत्मनिधि श्री जी आदि प्रातः ५.१५ बजे शिव जी राम भवन से पैदल बिहार कर आमेर पहुची. इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाएं भी उनके साथ थीं. आमेर पहुचने के बाद चैत्यवंदन के पश्चात श्री भक्तामर स्तोत्र का पाठ हुआ.
इसके बाद उपश्थित श्रद्धालुओं के लिए नाश्ते का आयोजन किया गया.
नाश्ते के बाद श्री नन्दीश्वर द्वीप की पूजा पढाई गई . यह प्राचीन पूजा आमेर मंदिर में ही दो सौ वर्ष पूर्व रचित हुई थी. तब से ही यह पूजा यहाँ पर अनवरत रूप से होती चली आ रही है. इस अवसर पर सदा की भांति नन्दीश्वर द्वीप की रचना भी की गई. नन्दीश्वर द्वीप के बावन जिनालयों में बावन जिन प्रतिमाओं की पूजा की गई. इन सभी जिनालयों को अच्छी तरह से श्रृंगारित व सुशोभित किया गया था.
पूजा के मध्य में मंदिर के ध्वजारोहण का कार्यक्रम भी हुआ. श्री विजय कुमार सचेती परिवार ने चढ़ावा बोल कर ध्वजा चढाने का लाभ लिया. पूज्या साध्वी मंडल के अतिरिक्त संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री मानक चंद गोलेछा ने पूजा पढ़ने में विशेष योगदान दिया.
पूजा के बाद साधर्मी वात्सल्य का आयोजन था. इस कार्यक्रम में लगभग २५०० लोगों उपस्थित थे. श्वेताम्बर आम्नाय के सभी पंथ खरतर गच्छ, तप गच्छ, स्थानक वासी, तेरापंथी आदि सभी ने इस मेले में भाग लिया. खरतर गच्छ संघ की पूर्व अध्यक्षा श्रीमती जतन कँवर गोलेछा, पूर्व अध्यक्ष श्री कुशल चंद सुराना, पूर्व मंत्री श्री नवरतन माल श्रीश्रीमाल, श्रीमाल सभा के मंत्री श्री धर्मेन्द्र टांक, मुल्तान सभा के मंत्री श्री नेमकुमार जैन व पूर्व अध्यक्ष श्री त्रिलोकचंद सिंघी, जवाहर नगर संघ के मंत्री श्री तिलोक चंद गोलेछा आदि अनेक गणमान्य व्यक्तिओं के साथ ही संघ के वर्त्तमान पदाधिकारियो व कर्करिणी समिति के सदस्यों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया.
भोजन व्यवस्था का संयोजन संघ के उपाध्यक्ष श्री राजेंद्र कुमार छाजेड एवं कोषाध्यक्ष श्री मोहनलाल डागा ने किया. आमेर के व्यवस्थापक श्री प्रताप लुनावत ने विशेष परिश्रम से सम्पूर्ण कार्यक्रम को सफल बनाया. श्री कमल लोढा की और से निशुल्क कैटरिंग की गई.
इस कार्य क्रम को भास्कर T V ने भी दिखाया.
कार्यक्रम का आयोजन श्री जैन श्वेताम्बर खरतर गच्छ संघ, जयपुर की और से कराया गया. कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिया संघ मंत्री श्री ज्योति कोठारी ने समस्त संघ का एवं सभी कार्यकर्ताओं का आभार जताया.
इसके बाद उपश्थित श्रद्धालुओं के लिए नाश्ते का आयोजन किया गया.
नाश्ते के बाद श्री नन्दीश्वर द्वीप की पूजा पढाई गई . यह प्राचीन पूजा आमेर मंदिर में ही दो सौ वर्ष पूर्व रचित हुई थी. तब से ही यह पूजा यहाँ पर अनवरत रूप से होती चली आ रही है. इस अवसर पर सदा की भांति नन्दीश्वर द्वीप की रचना भी की गई. नन्दीश्वर द्वीप के बावन जिनालयों में बावन जिन प्रतिमाओं की पूजा की गई. इन सभी जिनालयों को अच्छी तरह से श्रृंगारित व सुशोभित किया गया था.
पूजा के मध्य में मंदिर के ध्वजारोहण का कार्यक्रम भी हुआ. श्री विजय कुमार सचेती परिवार ने चढ़ावा बोल कर ध्वजा चढाने का लाभ लिया. पूज्या साध्वी मंडल के अतिरिक्त संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री मानक चंद गोलेछा ने पूजा पढ़ने में विशेष योगदान दिया.
पूजा के बाद साधर्मी वात्सल्य का आयोजन था. इस कार्यक्रम में लगभग २५०० लोगों उपस्थित थे. श्वेताम्बर आम्नाय के सभी पंथ खरतर गच्छ, तप गच्छ, स्थानक वासी, तेरापंथी आदि सभी ने इस मेले में भाग लिया. खरतर गच्छ संघ की पूर्व अध्यक्षा श्रीमती जतन कँवर गोलेछा, पूर्व अध्यक्ष श्री कुशल चंद सुराना, पूर्व मंत्री श्री नवरतन माल श्रीश्रीमाल, श्रीमाल सभा के मंत्री श्री धर्मेन्द्र टांक, मुल्तान सभा के मंत्री श्री नेमकुमार जैन व पूर्व अध्यक्ष श्री त्रिलोकचंद सिंघी, जवाहर नगर संघ के मंत्री श्री तिलोक चंद गोलेछा आदि अनेक गणमान्य व्यक्तिओं के साथ ही संघ के वर्त्तमान पदाधिकारियो व कर्करिणी समिति के सदस्यों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया.
भोजन व्यवस्था का संयोजन संघ के उपाध्यक्ष श्री राजेंद्र कुमार छाजेड एवं कोषाध्यक्ष श्री मोहनलाल डागा ने किया. आमेर के व्यवस्थापक श्री प्रताप लुनावत ने विशेष परिश्रम से सम्पूर्ण कार्यक्रम को सफल बनाया. श्री कमल लोढा की और से निशुल्क कैटरिंग की गई.
इस कार्य क्रम को भास्कर T V ने भी दिखाया.
कार्यक्रम का आयोजन श्री जैन श्वेताम्बर खरतर गच्छ संघ, जयपुर की और से कराया गया. कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिया संघ मंत्री श्री ज्योति कोठारी ने समस्त संघ का एवं सभी कार्यकर्ताओं का आभार जताया.
Amber Jain temple
Map of Amber templeSunday, 10 October 2010
आमेर में अठारह अभिषेक एवं दादागुरु देव पूजन संपन्न, मेला आज
आमेर श्री चंदाप्रभु भगवान के मंदिर व दादाबाड़ी में अठारह अभिषेक एवं दादागुरु देव पूजन कल ९ अक्टूबर को संपन्न हुआ. अमर तीर्थ पर ऐतिहासिक मेला आज दिनांक १० अक्टूबर को होने जा रहा है. इस अवसर पर परम पूज्य साध्वी श्री मणिप्रभा श्री जी की सुशिष्या गण प्. पु. साध्वी विद्युत्प्रभा श्री जी, हेमप्रज्ञा श्री जी, संयम निधि श्री जी, आत्मनिधि श्री जी आदि प्रातः ५.१५ बजे शिव जी राम भवन से पैदल बिहार कर आमेर पहुचेंगी. इस अवसर पर अनेक श्रावक श्राविकाएं भी उनके साथ होंगे.
मेले में आज श्री नन्दीश्वर द्वीप की पूजा पढाई जाएगी. यह प्राचीन पूजा आमेर मंदिर में ही दो सौ वर्ष पूर्व रचित हुई थी. तब से ही यह पूजा यहाँ पर अनवरत रूप से होती चली आ रही है.
पूजा के बाद साधर्मी वात्सल्य का आयोजन है. इस कार्यक्रम में लगभग २५०० से ३००० लोगों के उपस्थित रहने की सम्भावना है. श्वेताम्बर आम्नाय के सभी पंथ खरतर गच्छ, तप गच्छ, स्थानक वासी, तेरापंथी आदि सभी इस मेले में भाग लेते हैं.
कार्यक्रम का आयोजन श्री जैन श्वेताम्बर खरतर गच्छ संघ, जयपुर की और से कराया जा रहा है.
Map of Amber temple
मेले में आज श्री नन्दीश्वर द्वीप की पूजा पढाई जाएगी. यह प्राचीन पूजा आमेर मंदिर में ही दो सौ वर्ष पूर्व रचित हुई थी. तब से ही यह पूजा यहाँ पर अनवरत रूप से होती चली आ रही है.
पूजा के बाद साधर्मी वात्सल्य का आयोजन है. इस कार्यक्रम में लगभग २५०० से ३००० लोगों के उपस्थित रहने की सम्भावना है. श्वेताम्बर आम्नाय के सभी पंथ खरतर गच्छ, तप गच्छ, स्थानक वासी, तेरापंथी आदि सभी इस मेले में भाग लेते हैं.
कार्यक्रम का आयोजन श्री जैन श्वेताम्बर खरतर गच्छ संघ, जयपुर की और से कराया जा रहा है.
Amber Jain temple
Map of Amber temple
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Saturday, 9 October 2010
Atharah Abhishek and Dadaguru Dev pujan at Amer (Amber)
Mulgambhara, Amber temple
Gumbaz, Amber Jain temple
View of Amber fort from Dadabadi
Sri Jain Swetambar Khartar Gachchh Sangh will organizes Atharah Abhishek at Sri Chandaprabhu Jain temple, Amber and Dadabadi for cleaning and purification of the idols and foot prints tomorrow morning Saturday, October 9, 2010.Vidhikarak Prem Chand Shrishrimal will perform all rituals.
Atharah Abhishek Puja will be followed by Dadaguru Dev Puja in the Dadabadi, Amber. Both of these program is being organized on the previous day of Amer mela (Sunday, October 10, 2010)
Amber Jain temple
Map of Amber temple
Annual program of Chandaprabhu Jain temple, Amber on Sunday, October 10, 2010
Thursday, 7 October 2010
Annual program of Chandaprabhu Jain temple, Amber on Sunday, October 10, 2010
Annual program of Sri Chandaprabhu Jain temple, Amber will be held on Sunday, October 10, 2010. Nandishwar Dweep Pujan will be organized as usual in the morning followed by Sadharmi Vatsalya (Lunch). Large numbers of Jaipur Swetambar Jain people participate in this annual program popularly known as Amer Mela.
Sthanakvasi, Terapanthi, Tapagachchh, Khartar Gachchh all sects of Swetambar Jain community join the Amer Mela. However, the program is solely organized by the Khartar Gachchh Sangh, Jaipur.
Amber Jain temple is one of the oldest temple in Jaipur. Sri Chandaprabhu Swami is the main deity of the temple along with two other Tirthankar idols.
Sri Jin Kushal Suri Dadabadi is situated opposite to the temple.
Map of Amber temple
Sthanakvasi, Terapanthi, Tapagachchh, Khartar Gachchh all sects of Swetambar Jain community join the Amer Mela. However, the program is solely organized by the Khartar Gachchh Sangh, Jaipur.
Amber Jain temple is one of the oldest temple in Jaipur. Sri Chandaprabhu Swami is the main deity of the temple along with two other Tirthankar idols.
Sri Jin Kushal Suri Dadabadi is situated opposite to the temple.
Map of Amber temple
Monday, 4 October 2010
खोह मंदिर में वार्षिकोत्सव संपन्न
आज खोह मंदिर में वार्षिकोत्सव संपन्न हुआ. इस उपलक्ष्य में वहां प्रातः सत्रह भेदी पूजा पढाई गई. यह प्राचीन पूजा विविध राग रागिनिओं पर आधारित है. श्री मानक चंद गोलेछा एवं श्रीमती मनीषा राक्यान ने सुन्दर तरीके से यह पूजा पढ़ाई. परम पूज्या साध्वी श्री मणिप्रभा श्री जी की सुशिष्याओं का सान्निध्य भी इस कार्यक्रम में प्राप्त हुआ. इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया.
संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री मानक चंद गोलेछा, उपाध्यक्ष श्री राजेंद्र कुमार छाजेड, कोषाध्यक्ष श्री मोहन लाल डागा, सांस्कृतिक मंत्री श्री राजेंद्र भंसाली आदि संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी गण इस अवसर पर वहां मौजूद थे.
इस अवसर पर मंदिर के शिखर के ऊपर ध्वजा भी चढ़ाई गई. ध्वजा चढाने की बोली श्री गौतम बोथरा ने ली.
सम्पूर्ण विधि विधान विधिकारक प्रेम चंद श्रीश्रीमाल द्वारा संपन्न कराइ गई.
सत्रह भेदी पूजा के बाद साधर्मी वात्सल्य का आयोजन हुआ.
इसके पूर्व कल दिनांक २ अक्टूबर को इसी मंदिर में अठारह अभिषेक करवाया गया. इसका विधि विधान भी विधिकारक प्रेम चंद श्रीश्रीमाल द्वारा संपन्न कराया गया.
यह संपूर्ण कार्यक्रम श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ द्वारा आयोजित किया गया. खोह मंदिर के व्यवस्थापक श्री अशोक बुरड का कार्यक्रम को सफल बनाने में सराहनीय योगदान रहा.
यह बात विशेष रूप से उल्लेखनीय है की श्री सुपार्श्वनाथ स्वामी मंदिर, खोह जयपुर का प्राचीनतम जैन मंदिर है. जिसका अभी जीर्णोद्धार कराया जा रहा है.
मानचित्र, खोह मंदिर
संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री मानक चंद गोलेछा, उपाध्यक्ष श्री राजेंद्र कुमार छाजेड, कोषाध्यक्ष श्री मोहन लाल डागा, सांस्कृतिक मंत्री श्री राजेंद्र भंसाली आदि संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी गण इस अवसर पर वहां मौजूद थे.
इस अवसर पर मंदिर के शिखर के ऊपर ध्वजा भी चढ़ाई गई. ध्वजा चढाने की बोली श्री गौतम बोथरा ने ली.
सम्पूर्ण विधि विधान विधिकारक प्रेम चंद श्रीश्रीमाल द्वारा संपन्न कराइ गई.
सत्रह भेदी पूजा के बाद साधर्मी वात्सल्य का आयोजन हुआ.
इसके पूर्व कल दिनांक २ अक्टूबर को इसी मंदिर में अठारह अभिषेक करवाया गया. इसका विधि विधान भी विधिकारक प्रेम चंद श्रीश्रीमाल द्वारा संपन्न कराया गया.
यह संपूर्ण कार्यक्रम श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ द्वारा आयोजित किया गया. खोह मंदिर के व्यवस्थापक श्री अशोक बुरड का कार्यक्रम को सफल बनाने में सराहनीय योगदान रहा.
यह बात विशेष रूप से उल्लेखनीय है की श्री सुपार्श्वनाथ स्वामी मंदिर, खोह जयपुर का प्राचीनतम जैन मंदिर है. जिसका अभी जीर्णोद्धार कराया जा रहा है.
मानचित्र, खोह मंदिर
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