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Saturday, 9 December 2017

जयपुर में मचेगी पौष दसमी की धूम


जयपुर में मचेगी पौष दसमी की धूम 

२३वें तीर्थंकर पुरुषदानीय श्री पार्श्वनाथ भगवान् का २८९४ वां जन्म कल्याणक दिवस (पौष दसमी) १२ दिसंबर,२०१७ को धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है. इस अवसर पर श्री सुपार्श्वनाथ भगवन के बड़े मंदिर, घीवालों का रास्ता, जौहरी बाजार, जयपुर से प्रातः ८.३० बजे भव्य वरघोड़ा निकाला जायेगा। इस वरघोड़े का मुख्य आकर्षण है ऐतिहासिक भव्य रथ. पारसनाथ स्वामी के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में सम्पूर्ण श्वेताम्बर जैन समाज द्वारा सम्मिलित रूप से इस महोत्सव का आयोजन किया जाता है.

जयपुर का ऐतिहासिक रथ 
यह रथयात्रा जौहरी बाजार, बड़ी चौपड़, रामगंज, सूरजपोल होते हुए श्री सांवलिया पार्श्वनाथ मंदि, अरिहंत वाटिका, मोहनबाड़ी पहुंचेगी। रस्ते में सभी स्थानों पर स्थानीय पार्षदों, विधायकों, व्यापार मंडलों एवं राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों द्वारा रथयात्रा की अगवानी एवं स्वागत किया जाएगा. राजस्थान के माननीय गृहमंत्री श्री ग़ुलाबचन्द जी कटारिया, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष श्री अशोक जी परनामी एवं विधायक श्री मोहनलाल जी गुप्ता भी रथयात्रा में सम्मिलित होंगे.

श्री जैन श्वेताम्बर खरतर गच्छ संघ, जयपुर कार्यक्रम के मुख्य आयोजक हैं. साथ हैं जयपुर के अन्य अनेक संघ, संस्थाएं, मंडल, परिषद्, युवा एवं महिला प्रकोष्ठ आदि. कार्यक्रम संयोजक हैं श्री तिलोक चन्द गोलेच्छा. 

ऐतिहासिक भव्य रथ के साथ ही इन्द्रध्वज, हाथी, घोड़े, ऊंट, चांदी की पालकी, बैंड बाजे, भजन मंडलियां आदि भी इस भव्य जुलुश का आकर्षण होगा. बड़ी संख्या में महिलाओं द्वारा कलश लिया जायेगा और डांडिया नृत्य भी होगा. राजस्थान की घुड़सवार पुलिस पहली बार किसी जुलुश में शामिल होगी और ये इस जूलूश के आकर्षण का केंद्र विन्दु रहेगी.

रथयात्रा के बाद नवकारसी एवं भगवन पार्श्वनाथ की पञ्च कल्याणक पूजा होगी. तत्पश्चात साधर्मी वात्सल्य का कार्यक्रम रहेगा. नवकारसी, पूजा एवं साधर्मी वात्सल्यके लाभार्थी होंगे श्रीमान हुक्मीचंद जी विजेंद्र कुमार जी पूर्णेंद्र जी कांकरिया परिवार.

सभी साधर्मी वन्धुओं से सम्पूर्ण कार्यक्रम में पधारने की विनती है.

पौष दशमी का जुलुश और ऐतिहासिक रथ

पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक पौष दशमी कार्यक्रम

ज्योति कुमार कोठारी 


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Tuesday, 14 November 2017

पौष दशमी का जुलुश और ऐतिहासिक रथ

पौष दशमी का जुलुश और ऐतिहासिक रथ 

पिछले ब्लॉग में मैंने इस वर्ष होनेवाले पौष दशमी कार्यक्रम के बारे में लिखा था एवं उसमे ऐतिहासिक रथ के बारे में बताया था. यह रथ एक ऐतिहासिक विरासत है जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है. इस रथ का निर्माण श्री मांगीलाल जी जांगिड़ नाम के कलाकार ने करना शुरू किया था  (सन १८६९) परन्तु वह अपने जीवन काल में इसका निर्माण पूरा नहीं कर पाए. उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र श्री जयलाल जी ने इसका निर्माण पूरा किया. इस रथ को बनाने में ३५ वर्ष का लम्बा समय लगा. जब पौष बड़ी नवमी, सम्वत १९६१ (ईस्वी सन १९०४)  में पहली बार यह रथ पार्श्वनाथ भगवन की शोभायात्रा में निकला तब जयपुर की जनमेदिनी इसे देखने के लिए उमड़ पड़ी थी. तब से ले कर आज तक यह रथ पौष दशमी के जुलुश में निकलता है. श्री जैन श्वेताम्बर खरतर गच्छ संघ, जयपुर के लिए तब से ले कर आज तक यह रथ गौरव का विषय बना हुआ है.

मोहनबाड़ी में खड़ा भव्य रथ 
पहले पौष बड़ी ९ को यह वरघोड़ा श्री सुपार्श्व नाथ स्वामी के बड़े मंदिर से निकल कर मोहनबाड़ी जाता था और दूसरे दिन वहां से पौष बड़ी १० के दिन वापस बड़े मंदिर आता था. बाद में यह जुलुश एक दिन का रह गया और केवल मोहनबाड़ी से बड़े मंदिर, दड़ा, घीवालों का रास्ता, जोहरी बाजार, जयपुर तक आने लगा. इस वर्ष १२ दिसंबर को यह जुलुश फिर से बड़े मंदिर से मोहनबाड़ी तक ले जाया जायेगा।

जयलाल जी के पुत्र छाजुलाल जी ने भी इस काम को बखूबी संभाला. अब उनके पुत्र गिरधारी जी जांगिड़ भी इस रथ की सार संभाल कर रहे हैं. हर साल पौष दशमी के वरघोड़े से पहले वे स्वयं इस रथ के रख रखाव का काम सँभालते हैं और जुलुश में रथ को चलाने का काम करते हैं. ७३ वर्षीय गिरधारी जी ने स्मृतिचारण करते हुए  बताया की इस रथ से उनका पांच पीढ़ी का सम्वन्ध है. उन्होंने यह भी बताया की लगभग ५० साल पहले उनके ताऊजी ने इस रथ की मशीन बदल कर इसकी गति में वृद्धि की थी. पांच वर्ष पहले उन्होंने मुझे ३०-४० वर्ष पहले खींचे हुए रथ के ४ चित्र दिए थे जिन्हे मैंने उस समय ब्लॉग में पोस्ट किया था.

इस भव्य रथ का मुख्य आकर्षण इसमें जोते हुए दो सफ़ेद रंग के घोड़े हैं. यह घोड़े अत्यंत वलिष्ठ दीखते हैं और इनकी शान ही निराली है. भव्य साज के साथ इन दोनों घोड़ों को जो भी देखता है वो इसकी तारीफ किये बिना नहीं रह सकता. ६ पहियोंवाला यह रथ भी अपने आप में भव्यता लिए हुए है. सुन्दर कलात्मक कारीगरी एवं सोने का काम इसकी सुंदरता में चार चाँद लगाता है. रथ के ऊपर बना हुआ गुम्बज अपनी शोभा से सभी का मन मोह लेता है.

Thanks,
Jyoti Kothari

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